इंदौर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में एक—एमवायएच (MYH Hospital)—एक बार फिर अपनी अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। बुधवार को सामने आए एक वीडियो ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। वायरल वीडियो में अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टरों को मोबाइल फोन की टॉर्च लाइट और मोमबत्ती की कमजोर रोशनी में एक गरीब महिला का इलाज करते हुए देखा जा सकता है। इससे न सिर्फ मरीज परेशान दिखे बल्कि अस्पताल की गंभीर लापरवाही और तकनीकी खामियों की पोल भी खुलकर सामने आई।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। सवाल उठने लगे कि प्रदेश के इतने बड़े अस्पताल में आखिर कैसे बिजली का बैकअप उपलब्ध नहीं था? क्या यह सामान्य बिजली कटौती थी या फिर अस्पताल के रखरखाव में गंभीर लापरवाही?
वीडियो में अंधेरा साफ नजर आ रहा है और डॉक्टर किसी तरह मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे मरीज को जांचते दिख रहे हैं। इस दौरान अन्य मरीज भी परेशान और इंतजार करते दिखाई दिए। मरीजों का कहना है कि शिकायत करने बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई और उन्हें अंधेरे में ही बैठना पड़ा।
इस मामले पर एमवायएच अधीक्षक अशोक यादव ने स्वीकार किया कि वीडियो असली है और यह घटना बुधवार सुबह की है। उन्होंने बताया कि एमपीईबी द्वारा कैंसर अस्पताल ब्लॉक में तकनीकी कार्य के कारण कुछ मिनटों की बिजली कटौती की गई थी। उनका दावा है कि यह कटौती बहुत थोड़े समय के लिए थी और अस्पताल में बिजली तुरंत बहाल भी कर दी गई थी।
अधीक्षक ने यह भी कहा कि यह घटना नियमित ओपीडी क्षेत्र की नहीं, बल्कि कैंसर अस्पताल ब्लॉक से जुड़ी है, जहां तकनीकी कारणों से बिजली ब्लॉक लेना जरूरी था। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि कुछ मिनटों के लिए भी बिजली कटौती गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है, खासकर जब मरीजों का इलाज चल रहा हो।
इसके बावजूद सवाल यह है कि इतने बड़े और महत्वपूर्ण अस्पताल में बिजली का वैकल्पिक बैकअप सिस्टम क्यों सक्रिय नहीं था? जनरेटर, UPS और इमरजेंसी पावर सप्लाई आखिर क्यों नहीं चली? अगर यह कुछ मिनटों की कटौती थी, तो वीडियो में अंधेरा इतना गहरा क्यों दिख रहा है?
लोग सोशल मीडिया पर यह भी याद दिला रहे हैं कि इससे पहले भी MYH से कई लापरवाही भरे वीडियो सामने आ चुके हैं—कभी वार्ड में गंदगी, कभी मरीजों के बेड की कमी और कभी मशीनरी के खराब होने की शिकायतें। ऐसे में इस नए वीडियो ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
वीडियो सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ गया है। उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में जांच होगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। क्योंकि यह केवल बिजली कटौती का मुद्दा नहीं, बल्कि मरीजों की जान से जुड़ा एक गंभीर सवाल है।
