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Saturday, March 14, 2026
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Supreme Court ने Bihar में Special Voter List Revision पर दी चेतावनी, किसी भी गैरकानूनी काम पर प्रक्रिया होगी रद्द

Supreme Court ने सोमवार को कहा कि वह मान रहा है कि चुनाव आयोग, जो एक संवैधानिक निकाय है, बिहार में होने वाले मतदान हेतु विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान कानून का पालन कर रहा है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया में कोई भी गैरकानूनी गतिविधि पाई जाती है, तो इसे रद्द कर दिया जाएगा। यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के संशोधन को लेकर उठी कई चुनौतियों और विवादों के बीच आया है।

7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट सुनेगा सभी तर्क

Supreme Court की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची शामिल हैं, ने बिहार SIR की वैधता पर अंतिम तर्क सुनने के लिए 7 अक्टूबर की तारीख तय की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया पर कोई आंशिक या अलग-अलग राय नहीं दी जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि पूरे देश में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी दायरे में रहे।

Supreme Court ने Bihar में Special Voter List Revision पर दी चेतावनी, किसी भी गैरकानूनी काम पर प्रक्रिया होगी रद्द

सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरे भारत के लिए लागू

बेंच ने कहा कि “बिहार SIR पर हमारा निर्णय पूरे भारत में होने वाले SIR पर लागू होगा।” हालांकि, बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि वह चुनाव आयोग को पूरे देश में मतदाता सूची संशोधन की समान प्रक्रिया को आयोजित करने से रोक नहीं सकता। फिर भी, बिहार SIR के खिलाफ याचिकाकर्ताओं को 7 अक्टूबर को पूरे भारत में SIR पर तर्क प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि कोर्ट केवल बिहार तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में इस प्रक्रिया के दायरे और कानूनी वैधता पर विचार करेगा।

आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर के अपने आदेश के खिलाफ एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया था कि बिहार SIR में मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आधार कार्ड को 12वें अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। चुनाव आयोग को केवल यह सुनिश्चित करना है कि जब कोई मतदाता अपना आधार प्रस्तुत करता है, तो उसकी वास्तविकता की जांच की जा सके। इस फैसले से मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आधार की भूमिका स्पष्ट हुई है, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

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