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Sunday, March 22, 2026
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महाराष्ट्र के नेताओं ने RSS संस्थापक स्मारक पर दी श्रद्धांजलि, अजित पवार ने दोबारा बनाई दूरी इस बार एनसीपी भी अनुपस्थित

14 दिसंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित भाजपा और शिव सेना के कई विधायक नागपुर स्थित आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की स्मृति मंदिर पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, राज्य की महा विकास अघाड़ी सरकार के सहयोगी दल एनसीपी के विधायक, जिनमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी शामिल थे, इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। स्मृति मंदिर, जो हेडगेवार और दूसरे आरएसएस प्रमुख एम.एस. गोलवलकर को समर्पित है, को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बड़े सम्मान के साथ नमन किया।

शीतकालीन सत्र के बीच स्मृति मंदिर का महत्व

नागपुर में महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस दौरान राजनीतिक दलों के बीच आरएसएस के संस्थापक को श्रद्धांजलि देना एक महत्वपूर्ण रिवाज बन गया है। इस मौके पर विधानसभा स्पीकर राहुल नरवकेर, विधानपरिषद के अध्यक्ष राम शिंदे और भाजपा तथा शिव सेना के कई अन्य विधायक भी मौजूद थे। पिछले वर्ष भी भाजपा और शिव सेना के विधायक इस स्मृति मंदिर में गए थे, लेकिन एनसीपी के अजित पवार अनुपस्थित थे। यह परंपरा आरएसएस के प्रति सम्मान और संगठन से जुड़ी विचारधारा की पुष्टि करती है।

एकनाथ शिंदे का स्मृति मंदिर के प्रति भाव

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि नागपुर आने पर स्मृति मंदिर का दौरा करना उनकी आदत में शामिल है। उन्होंने बताया कि यहां आने से देशभक्ति की भावना जागृत होती है। यह जगह उन्हें प्रेरणा देती है और समाज सेवा का साहस भी बढ़ाती है। शिंदे ने कहा कि नागपुर आरएसएस की जन्मभूमि है। यहां आने वाला हर व्यक्ति ऊर्जा और उत्साह के साथ वापस लौटता है। यह वर्ष आरएसएस के 100 साल पूरे होने का जश्न भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी आरएसएस से उभरकर देश के लिए काम कर रहे हैं, जो हमारे लिए प्रेरणादायक है।

महाराष्ट्र सरकार के नेताओं की प्रतिक्रियाएं

महाराष्ट्र के मंत्री पंकज राजेश भोयर ने कहा कि स्मृति मंदिर का यह स्थान प्रेरणा और ऊर्जा का स्रोत है। इसलिए यहां संगठन के कई प्रतिनिधि आते हैं और नए जोश के साथ समाज सेवा के कार्यों में लग जाते हैं। महाराष्ट्र भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष चित्रा किशोर वाघ ने भी कहा कि इस मंदिर की यात्रा से वे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करती हैं। वे हर साल यहां आती हैं और यह सीखती हैं कि जनता की सेवा कैसे की जाए। यह स्थान समाज सेवा के लिए सीखने और प्रेरणा पाने का केंद्र है।

आरएसएस की विरासत और भविष्य

केशव बलिराम हेडगेवार ने लगभग सौ साल पहले आरएसएस की स्थापना नागपुर में की थी। यह साल आरएसएस के सौ वर्ष पूरे होने का वर्ष भी है। इस वजह से स्मृति मंदिर का दौरा और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। यह स्थल आरएसएस की विचारधारा और उसके कार्यों का प्रतीक है। भाजपा और शिव सेना के नेताओं द्वारा यहां आने से यह संकेत मिलता है कि वे आरएसएस के सिद्धांतों और विचारों को महत्व देते हैं। आने वाले समय में भी इस स्थान का महत्व और बढ़ेगा क्योंकि यह संगठन और उसके नेता देश सेवा के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत हैं।

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