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Friday, March 13, 2026
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India-New Zealand FTA: भारत और न्यूजीलैंड ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम समझौता किया, PM मोदी ने साझा किया

India-New Zealand FTA: मार्च 2025 में शुरू हुई भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार (Free Trade Agreement – FTA) वार्ता अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। दोनों देशों के बीच यह ऐतिहासिक समझौता भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच फोन कॉल के माध्यम से अंतिम रूप दिया गया। न्यूजीलैंड सरकार ने इस समझौते की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से साझा की, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोशल मीडिया पर इस सौदे की जानकारी दी। यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।

भारत–न्यूजीलैंड FTA समझौते का महत्व

भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह मुक्त व्यापार समझौता तैयार होने में कुल नौ महीने लगे। वार्ता की शुरुआत मार्च 2025 में तब हुई थी जब न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री भारत दौरे पर आए थे। अब, वर्ष के अंत से पहले, दोनों देशों के नेताओं ने इस समझौते को औपचारिक रूप से अंतिम रूप दे दिया है। इस समझौते के तहत, मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार को आने वाले पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक विकास और निवेश के नए अवसर खोलेगा और व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करेगा।

निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में लाभ

इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत, अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड भारत में 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगा। यह निवेश कृषि, शिक्षा, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीकी क्षेत्र और स्टार्टअप जैसी विभिन्न क्षेत्रों में भारत की प्रगति को गति देगा। विशेषकर तकनीकी और स्टार्टअप सेक्टर में इस निवेश से युवा उद्यमियों को नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण में सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। इस समझौते से न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत होगी।

भारत की वैश्विक व्यापारिक स्थिति मजबूत

भारत इस समय दुनिया के कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रहा है। न्यूजीलैंड से पहले भारत के पास ओमान, मॉरिशस, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, UAE और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों के साथ FTA समझौते हैं। लगातार ऐसे समझौते करके भारत वैश्विक व्यापार में एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस तरह के समझौते न केवल भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाएंगे बल्कि विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित करेंगे, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। भारत की यह रणनीति उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत और प्रभावशाली स्थिति दिलाने में सहायक साबित होगी।

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